केसर सिंह / स्वदेशी हेल्थ रिसर्च टीम
भारत में किडनी स्टोन (Renal Calculi / Nephrolithiasis) एक तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। पहले इसे मुख्यतः मध्यम आयु और बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब युवा वर्ग भी बड़ी संख्या में इसकी चपेट में आ रहा है। आधुनिक जीवनशैली, कम पानी पीने की आदत, बढ़ता तापमान, प्रोसेस्ड फूड और मेटाबोलिक विकार इस समस्या को और बढ़ा रहे हैं। चिकित्सकीय आंकड़ों के अनुसार लगभग 9 प्रतिशत लोगों को जीवनकाल में कभी न कभी किडनी स्टोन की समस्या का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्तमान जीवनशैली में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में इसके मामले और बढ़ सकते हैं।
आखिर किडनी स्टोन बनता कैसे है?
हमारी किडनियां रक्त से अपशिष्ट पदार्थों को छानकर मूत्र के माध्यम से बाहर निकालती हैं। सामान्य परिस्थितियों में ये रसायन मूत्र में घुले रहते हैं, लेकिन जब मूत्र अत्यधिक सघन (Concentrated Urine) हो जाता है, तब कैल्शियम, ऑक्सालेट, फॉस्फेट, यूरिक एसिड और अन्य खनिज पदार्थ क्रिस्टल का रूप लेने लगते हैं। समय के साथ ये सूक्ष्म क्रिस्टल आपस में जुड़कर पथरी (Stone) का निर्माण कर सकते हैं। यह प्रक्रिया ठीक उसी प्रकार होती है जैसे किसी गुफा में धीरे-धीरे स्टैलेक्टाइट्स और स्टैलेग्माइट्स विकसित होते हैं।
किडनी स्टोन के लक्षण: कब सतर्क हो जाना चाहिए?
कई बार पथरी लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के किडनी में बनी रह सकती है। ऐसे मामलों में यह किसी अन्य कारण से कराए गए अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे या सीटी स्कैन में संयोगवश पता चलती है।
हालांकि जैसे-जैसे पथरी आकार में बढ़ती है या मूत्रमार्ग में खिसकती है, लक्षण स्पष्ट होने लगते हैं।
प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:
- कमर के किनारे (Flank Region) में दर्द
- मूत्र में सूक्ष्म रक्तस्राव (Microscopic Hematuria)
- बार-बार मूत्र संक्रमण (Urinary Tract Infection)
- पेशाब में खून आना
- पेशाब करते समय जलन
- बार-बार पेशाब की इच्छा होना
- मतली और उल्टी
सबसे गंभीर लक्षण यूरेट्रिक कोलिक (Ureteric Colic) है। यह वह स्थिति है जब पथरी किडनी से निकलकर यूरेटर (Ureter) में फंस जाती है। दर्द इतना तीव्र हो सकता है कि मरीज को तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है।
दर्द आमतौर पर कमर से शुरू होकर पेट, जांघों के जोड़ (Groin), अंडकोष या महिलाओं में लेबिया तक फैल सकता है।
यदि आपको पथरी होने का संदेह हो तो क्या करें?
किडनी स्टोन के लक्षण कई अन्य बीमारियों जैसे रीढ़ की समस्याओं, पेट के विकारों या मूत्र रोगों से भी मिलते-जुलते हो सकते हैं। इसलिए स्वयं निदान करने के बजाय चिकित्सकीय जांच करवाना आवश्यक है।
यदि दर्द अचानक शुरू हुआ हो, अत्यधिक तीव्र हो या पेशाब में खून दिखाई दे रहा हो, तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
डॉक्टर निम्न जांचों की सलाह दे सकते हैं:
- मूत्र परीक्षण (Urine Analysis)
- रक्त जांच
- अल्ट्रासोनोग्राफी
- एक्स-रे KUB
- नॉन-कॉन्ट्रास्ट सीटी स्कैन (NCCT KUB)
इन जांचों के आधार पर यह निर्धारित किया जाता है कि पथरी अपने आप निकल सकती है या शल्य चिकित्सा अथवा अन्य हस्तक्षेप की आवश्यकता होगी।
किडनी स्टोन के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य
चिकित्सकीय अध्ययनों के अनुसार:
- प्रत्येक 12 में से लगभग 1 व्यक्ति में सीटी स्कैन के दौरान संयोगवश पथरी पाई जाती है।
- लगभग 9 प्रतिशत लोगों को जीवनकाल में कभी न कभी स्टोन संबंधी लक्षण विकसित होते हैं।
- पुरुषों में यह समस्या महिलाओं की तुलना में थोड़ी अधिक देखी जाती है।
- पहली बार पथरी बनने की औसत आयु लगभग 45 वर्ष मानी जाती है।
- एक बार पथरी हो जाने पर अगले 10 वर्षों में दोबारा पथरी बनने की संभावना लगभग 50 प्रतिशत तक हो सकती है।
पथरी के विभिन्न प्रकार
1. कैल्शियम आधारित पथरी (60–80%)
यह सबसे सामान्य प्रकार है। इसमें मुख्य रूप से कैल्शियम ऑक्सालेट और कैल्शियम फॉस्फेट शामिल होते हैं। कैल्शियम ऑक्सालेट स्टोन विश्वभर में सबसे अधिक पाए जाने वाले स्टोन माने जाते हैं। मूत्र में कैल्शियम और ऑक्सालेट की अधिकता इनके निर्माण का प्रमुख कारण होती है।
2. स्ट्रूवाइट स्टोन (10–15%)
इन्हें संक्रमण पथरी (Infection Stones) या ट्रिपल फॉस्फेट स्टोन भी कहा जाता है। ये आमतौर पर बार-बार होने वाले मूत्र संक्रमण से संबंधित होते हैं। कुछ बैक्टीरिया मूत्र को क्षारीय बना देते हैं, जिससे बड़े आकार की पथरियां बनने लगती हैं। कई बार ये पूरी किडनी को भर देती हैं, जिन्हें स्टैगहॉर्न कैलकुली (Staghorn Calculi) कहा जाता है।
3. यूरिक एसिड स्टोन (5–10%)
ये अम्लीय मूत्र (Acidic Urine) में बनते हैं और अधिक पशु-प्रोटीन खाने वाले व्यक्तियों में अपेक्षाकृत अधिक देखे जाते हैं। मेटाबोलिक सिंड्रोम और मधुमेह से पीड़ित लोगों में भी इनका जोखिम बढ़ जाता है।
4. सिस्टीन स्टोन (1%)
यह एक दुर्लभ लेकिन आनुवंशिक विकार सिस्टीनूरिया (Cystinuria) के कारण बनती है। कम आयु में बार-बार पथरी बनने वाले मरीजों में इसकी संभावना पर विचार किया जाता है। ऐसे मरीजों को दीर्घकालिक निगरानी और विशेष उपचार की आवश्यकता होती है।
5. अन्य दुर्लभ पथरियां
कुछ दवाएं जैसे ट्रायमटेरिन (Triamterene) और इंडिनाविर (Indinavir) मूत्र में क्रिस्टल बनाकर पथरी का कारण बन सकती हैं। अत्यंत दुर्लभ मामलों में जैंथीन (Xanthine) स्टोन भी देखे जाते हैं।
किन लोगों में किडनी स्टोन बनने का खतरा अधिक होता है?
किडनी स्टोन बनने के पीछे अनेक जैविक और पर्यावरणीय कारण जिम्मेदार होते हैं।
आंतरिक (Intrinsic) जोखिम कारक
- आनुवंशिक प्रवृत्ति
- पुरुष लिंग
- बढ़ती आयु
- पारिवारिक इतिहास
- सिस्टीनूरिया जैसे वंशानुगत विकार
बाहरी (Extrinsic) जोखिम कारक
- गर्म जलवायु
- बार-बार डिहाइड्रेशन
- कम पानी पीना
- अत्यधिक नमक का सेवन
- पशु-प्रोटीन से भरपूर आहार
- रिफाइंड शुगर का अधिक उपयोग
- गतिहीन जीवनशैली
विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश मामलों में कोई एक कारण नहीं बल्कि कई जोखिम कारकों का संयुक्त प्रभाव पथरी निर्माण के लिए जिम्मेदार होता है।
मेटाबोलिक सिंड्रोम और किडनी स्टोन का संबंध
हाल के वर्षों में शोधकर्ताओं ने किडनी स्टोन और मेटाबोलिक सिंड्रोम के बीच महत्वपूर्ण संबंध पाया है।
मेटाबोलिक सिंड्रोम में निम्न समस्याएं शामिल होती हैं:
- मोटापा
- उच्च रक्तचाप
- इंसुलिन रेजिस्टेंस
- बढ़ा हुआ ब्लड शुगर
- असामान्य लिपिड प्रोफाइल
इंसुलिन रेजिस्टेंस किडनी की अम्ल-क्षार संतुलन प्रणाली को प्रभावित करता है, जिससे मूत्र अधिक अम्लीय हो जाता है और यूरिक एसिड स्टोन बनने का खतरा बढ़ जाता है।
बचाव ही सबसे प्रभावी उपचार
विशेषज्ञों के अनुसार किडनी स्टोन के अधिकांश मामलों को जीवनशैली में सुधार करके रोका जा सकता है।
बचाव के लिए निम्न उपाय महत्वपूर्ण हैं:
- प्रतिदिन पर्याप्त मात्रा में पानी पीना
- नमक का सेवन सीमित करना
- संतुलित प्रोटीन लेना
- ताजे फल और सब्जियों का सेवन बढ़ाना
- नियमित शारीरिक गतिविधि करना
- मोटापा नियंत्रित रखना
- बार-बार स्टोन बनने वालों में नियमित चिकित्सकीय जांच कराना
निष्कर्ष
किडनी स्टोन एक सामान्य लेकिन उपेक्षित स्वास्थ्य समस्या है। समय रहते लक्षणों की पहचान, उचित जांच और जीवनशैली में सुधार द्वारा न केवल इसका प्रभावी उपचार संभव है, बल्कि भविष्य में इसके दोबारा बनने के जोखिम को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है। स्वस्थ किडनी केवल पर्याप्त पानी पीने से ही नहीं, बल्कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और जागरूक जीवनशैली से सुरक्षित रखी जा सकती है। इसलिए यदि आपको पथरी का इतिहास है या इसके जोखिम कारक मौजूद हैं, तो नियमित चिकित्सकीय परामर्श और जांच को अपनी स्वास्थ्य दिनचर्या का हिस्सा अवश्य बनाएं।
अस्वीकरण: यह लेख केवल स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी बीमारी के निदान या उपचार के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।
