भारत के युवाओं की किडनी में क्यों बढ़ रही है पथरी?

Swadeshi Health
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लेखक: स्वदेशी हेल्थ टीम

कुछ दशक पहले तक गुर्दे की पथरी (किडनी स्टोन) को मुख्यतः मध्यम आयु और बुजुर्गों की समस्या माना जाता था। लेकिन आज तस्वीर बदल चुकी है। देश के अस्पतालों और यूरोलॉजी क्लीनिकों में 20 से 40 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कई विशेषज्ञ इसे भारत में उभरती हुई “साइलेंट किडनी महामारी” का संकेत मान रहे हैं। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार भारत की लगभग 10 से 15 प्रतिशत आबादी जीवन में कभी न कभी किडनी स्टोन की समस्या का सामना करती है। उत्तर भारत, विशेषकर दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश को लंबे समय से “स्टोन बेल्ट” कहा जाता है, जहां पथरी के मामले अपेक्षाकृत अधिक पाए जाते हैं। चिंताजनक बात यह है कि अब इस समस्या का बोझ युवाओं पर अधिक दिखाई दे रहा है।


आखिर ऐसा क्या बदल गया है कि युवाओं की किडनियां पहले की तुलना में अधिक जोखिम में हैं?

बढ़ती गर्मी और डिहाइड्रेशन: सबसे बड़ा कारण

भारत में लगातार बढ़ते तापमान और हीटवेव की घटनाओं ने किडनी रोग विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। गर्म मौसम में शरीर से अधिक पसीना निकलता है, जिससे पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) हो जाती है। जब शरीर में पर्याप्त पानी नहीं होता, तो पेशाब अधिक गाढ़ा हो जाता है और उसमें मौजूद खनिज पदार्थ आपस में मिलकर क्रिस्टल बनाने लगते हैं। यही छोटे-छोटे क्रिस्टल समय के साथ पथरी का रूप ले सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, आज का युवा वर्ग घंटों ऑफिस, कॉलेज, कोचिंग सेंटर, फैक्ट्री या खुले वातावरण में काम करता है, लेकिन पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीता। एयर-कंडीशनर वाले कमरों में काम करने वाले लोगों को अक्सर प्यास कम लगती है, जिससे वे अनजाने में डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाते हैं। डॉ. दीपक अग्रवाल बताते हैं कि गर्मियों के महीनों में किडनी स्टोन से संबंधित मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जाती है। कई अस्पतालों में अप्रैल से जून के बीच युवाओं के मामलों में 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

बदलती थाली और फास्ट फूड संस्कृति

भारतीय युवाओं के खान-पान में पिछले 15 वर्षों में बड़ा बदलाव आया है। घर के पारंपरिक भोजन की जगह अब प्रोसेस्ड और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों ने ले ली है। इंस्टेंट नूडल्स, चिप्स, बर्गर, पिज्जा, फ्रोजन फूड, प्रोसेस्ड मीट, कोल्ड ड्रिंक्स और एनर्जी ड्रिंक्स जैसी चीजें आसानी से उपलब्ध हैं और तेजी से लोकप्रिय भी हुई हैं। लेकिन इन खाद्य पदार्थों में नमक, चीनी और कृत्रिम एडिटिव्स की मात्रा अक्सर बहुत अधिक होती है।

अत्यधिक सोडियम का सेवन शरीर में कैल्शियम के उत्सर्जन को बढ़ाता है। जब पेशाब में कैल्शियम की मात्रा बढ़ती है, तो कैल्शियम आधारित पथरी बनने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसके अलावा, मीठे और कार्बोनेटेड पेय पदार्थ शरीर के जल संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ अध्ययनों में नियमित शुगरी ड्रिंक्स के सेवन और किडनी स्टोन के बढ़ते जोखिम के बीच संबंध पाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि फास्ट फूड केवल मोटापा ही नहीं बढ़ा रहा, बल्कि किडनी स्वास्थ्य को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है।

फिटनेस की दौड़ में बढ़ता खतरा

आज का युवा फिटनेस के प्रति पहले से कहीं अधिक जागरूक है। यह सकारात्मक बदलाव है, लेकिन कई बार बिना विशेषज्ञ सलाह के अपनाई गई फिटनेस आदतें नुकसानदायक भी साबित हो सकती हैं। जिम संस्कृति के बढ़ने के साथ प्रोटीन पाउडर, प्री-वर्कआउट ड्रिंक्स, क्रिएटिन सप्लीमेंट्स और विभिन्न प्रकार के पोषण उत्पादों का उपयोग भी बढ़ा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि आवश्यकता से अधिक प्रोटीन लेने पर शरीर में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ सकता है, जो कुछ प्रकार की पथरी बनने में योगदान देता है। इसके अलावा, कुछ लोग अत्यधिक मात्रा में विटामिन-डी और कैल्शियम सप्लीमेंट भी लेने लगते हैं। यदि इनका सेवन चिकित्सकीय निगरानी के बिना किया जाए, तो यह किडनी में खनिज जमा होने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

डॉक्टरों का कहना है कि समस्या केवल सप्लीमेंट्स नहीं हैं, बल्कि उनका अनियंत्रित और अनावश्यक उपयोग है।

बैठकर काम करने वाली जीवनशैली का प्रभाव

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार शारीरिक निष्क्रियता कई गैर-संचारी रोगों का प्रमुख जोखिम कारक है। किडनी स्टोन भी इससे अछूता नहीं है। आज बड़ी संख्या में युवा दिन का अधिकांश समय कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल स्क्रीन के सामने बिताते हैं। घंटों तक बैठे रहने, कम शारीरिक गतिविधि, अनियमित नींद और बढ़ते तनाव का असर पूरे मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है। शोध बताते हैं कि मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस और मेटाबॉलिक सिंड्रोम से ग्रस्त लोगों में किडनी स्टोन का जोखिम अधिक होता है। ये स्थितियां शरीर में ऐसे रासायनिक परिवर्तन उत्पन्न करती हैं जो पथरी बनने की संभावना बढ़ा सकती हैं।

लक्षण जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए

कई युवा शुरुआत में पथरी के संकेतों को सामान्य पेट दर्द या गैस की समस्या समझकर टाल देते हैं। लेकिन समय पर पहचान और उपचार बेहद जरूरी है। किडनी स्टोन के प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:

• कमर या पीठ के एक तरफ अचानक तेज दर्द
• दर्द का पेट या जांघ तक फैलना
• पेशाब में जलन
• पेशाब में खून आना
• बार-बार पेशाब लगना
• मतली और उल्टी
• पेशाब करते समय असहनीय दर्द

यदि इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।

क्या किडनी स्टोन से बचाव संभव है?

अच्छी खबर यह है कि अधिकांश मामलों में किडनी स्टोन की रोकथाम संभव है। विशेषज्ञ कुछ सरल लेकिन प्रभावी उपायों की सलाह देते हैं।

1. पर्याप्त पानी पिएं
दिनभर में इतना पानी पिएं कि पेशाब का रंग हल्का पीला या लगभग साफ दिखाई दे।

2. नमक कम करें
अत्यधिक नमक पथरी के जोखिम को बढ़ाता है। पैकेज्ड स्नैक्स और प्रोसेस्ड फूड का सेवन सीमित करें।

3. संतुलित प्रोटीन लें
प्रोटीन शरीर के लिए जरूरी है, लेकिन आवश्यकता से अधिक सेवन नुकसान पहुंचा सकता है।

4. फल और सब्जियां बढ़ाएं
फल, सब्जियां और फाइबर युक्त भोजन शरीर के खनिज संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं।

5. नियमित व्यायाम करें
रोजाना कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि किडनी सहित पूरे शरीर के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।

निष्कर्ष: युवाओं को अभी से सावधान होने की जरूरत

किडनी स्टोन केवल दर्द की समस्या नहीं है। बार-बार पथरी बनने से संक्रमण, मूत्र मार्ग में रुकावट और दीर्घकाल में किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। भारत के युवाओं में बढ़ती पथरी की समस्या आधुनिक जीवनशैली, जलवायु परिवर्तन, फास्ट फूड संस्कृति और डिहाइड्रेशन का संयुक्त परिणाम है। अच्छी बात यह है कि अधिकांश जोखिम कारकों को बदला जा सकता है। पर्याप्त पानी पीना, संतुलित भोजन करना, अनावश्यक सप्लीमेंट्स से बचना और सक्रिय जीवनशैली अपनाना—ये छोटे कदम भविष्य में बड़ी किडनी समस्याओं से बचा सकते हैं।

हेल्थ संदेश: यदि आपको बार-बार कमर दर्द, पेशाब में जलन या पथरी का पारिवारिक इतिहास है, तो नियमित स्वास्थ्य जांच और चिकित्सकीय परामर्श को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। स्वस्थ किडनी ही स्वस्थ भविष्य की आधारशिला है।

अस्वीकरण: यह लेख केवल स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी बीमारी के निदान या उपचार के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

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