पिछले कुछ वर्षों के अध्ययन और चिंतन में यह महसूस हुआ कि दुनिया में अनेक ऐसी चिकित्सा प्रणालियाँ हैं जिनके पीछे केवल इलाज नहीं, बल्कि मनुष्य और प्रकृति के बीच संतुलन का गहरा दर्शन छिपा हुआ है। कुछ चिकित्सा पद्धतियाँ संस्थागत रूप से स्थापित हो गईं, लेकिन सैकड़ों ऐसी परंपराएँ आज भी गाँवों, आश्रमों, जनजातीय इलाकों, लोक वैद्यों, साधकों और परंपरागत ज्ञान धारकों के बीच जीवित हैं।
कम्प्लीट मेडिकल साइंस और कम्प्लीमेंट्री मेडिकल साइंस
विश्व स्तर पर जहाँ लगभग 18 “कम्प्लीट मेडिकल साइंस” अपनी स्वतंत्र चिकित्सा प्रणाली के रूप में मौजूद हैं, वहीं लगभग 770 से अधिक “कम्प्लीमेंट्री मेडिकल साइंस” और पारंपरिक उपचार पद्धतियाँ भी विभिन्न देशों और संस्कृतियों में प्रचलित हैं। Wheat Grass Therapy, Chiropractic Therapy, Herbal Medicine, Phytotherapy, Yoga, Meditation, प्राकृतिक चिकित्सा, लोक-चिकित्सा और ऐसी सैकड़ों पद्धतियाँ आज भी लोगों द्वारा अपने अनुभव, विश्वास और पीढ़ियों से चले आ रहे ज्ञान के आधार पर संरक्षित की जा रही हैं। लेकिन दुख की बात यह है कि इनका बड़ा हिस्सा धीरे-धीरे बिना दस्तावेज़ बने ही समाप्त होता जा रहा है।“स्वदेशी हेल्थ रिसर्च सेंटर” इसी चिंता और संकल्प से जन्मा एक प्रयास है। यह केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि उन विलुप्त होती परंपराओं, भूले-बिसरे उपचार ज्ञान और स्वदेशी स्वास्थ्य दर्शन को सहेजने की एक कोशिश है, जिन्हें आधुनिक समय ने हाशिये पर धकेल दिया है।
इस केंद्र का उद्देश्य किसी एक चिकित्सा पद्धति को श्रेष्ठ बताना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में मौजूद विविध ज्ञान परंपराओं को समझना, उनका अध्ययन करना, उनका दस्तावेजीकरण करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए उन्हें सुरक्षित रखना है।
स्वदेशी हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट अपने पोर्टल और शोध कार्यों के माध्यम से —
- विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के इतिहास, दर्शन और सिद्धांतों को लोगों तक पहुँचाएगा,
- लोक और पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान का डॉक्यूमेंटेशन करेगा,
- उन उपचार परंपराओं को संरक्षित करने का प्रयास करेगा जिन पर अब तक बहुत कम संस्थागत कार्य हुआ है,
- तथा स्वास्थ्य को केवल “बीमारी के इलाज” नहीं बल्कि जीवन, प्रकृति और संतुलन के व्यापक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास करेगा।
प्रैक्टिकल और नवाचार
इसके साथ-साथ सेंटर के कैंपस में विभिन्न स्वदेशी, पारंपरिक और पूरक चिकित्सा पद्धतियों की प्रैक्टिकल कार्यशालाएँ, अध्ययन सत्र, अनुभव आधारित प्रशिक्षण और डेमोंस्ट्रेशन भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि ज्ञान केवल किताबों और शब्दों तक सीमित न रहे, बल्कि व्यवहार और अनुभव के माध्यम से भी जीवित रह सके।
यह प्रयास उन अनगिनत ज्ञात-अज्ञात लोगों को भी एक श्रद्धांजलि है, जिन्होंने सदियों तक मानवता के स्वास्थ्य ज्ञान को बचाकर रखा, लेकिन जिनका नाम इतिहास के पन्नों में कहीं दर्ज नहीं हो पाया।
स्वदेशी हेल्थ रिसर्च सेंटर का सपना है,ज्ञान को बचाना, परंपराओं को जोड़ना, और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वास्थ्य की उस विरासत को सुरक्षित रखना, जो केवल चिकित्सा नहीं, बल्कि सभ्यता की स्मृति हैं।
आचार्य केसर