क्या पैकेटबंद और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड भोजन बढ़ा रहे हैं बड़ी आंत के कैंसर का खतरा?

Swadeshi Health
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28 वर्षों तक चले अमेरिकी अध्ययन में सामने आए चिंताजनक निष्कर्ष

स्वास्थ्य विशेषांक | स्वदेशी हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट

पिछले कुछ दशकों में दुनिया भर में खानपान की आदतों में तेजी से बदलाव आया है। ताजा, प्राकृतिक और घर पर बने भोजन की जगह अब पैकेटबंद, रेडी-टू-ईट और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ (Ultra-Processed Foods) तेजी से लोगों के दैनिक आहार का हिस्सा बनते जा रहे हैं। इन खाद्य पदार्थों की बढ़ती खपत ने मोटापा, मधुमेह, हृदय रोग और मेटाबोलिक सिंड्रोम जैसी गैर-संचारी बीमारियों (Non-Communicable Diseases) के साथ-साथ कैंसर के जोखिम को लेकर भी गंभीर चिंताएं उत्पन्न की हैं।


ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (BMJ) में प्रकाशित एक महत्वपूर्ण शोध ने संकेत दिया है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स का अधिक सेवन विशेष रूप से पुरुषों में कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal Cancer) के जोखिम को बढ़ा सकता है। यह अध्ययन अमेरिका के तीन बड़े दीर्घकालिक (Prospective Cohort) शोध समूहों पर आधारित था, जिसमें दो लाख से अधिक प्रतिभागियों का लगभग तीन दशकों तक अनुवर्ती अध्ययन किया गया।

कोलोरेक्टल कैंसर क्या है?

कोलोरेक्टल कैंसर बड़ी आंत (Colon) और मलाशय (Rectum) में विकसित होने वाला कैंसर है। यह विश्वभर में कैंसर से होने वाली मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है। अधिकांश मामलों में यह कैंसर आंत की भीतरी परत में बनने वाले छोटे पॉलीप्स (Polyps) से शुरू होता है, जो समय के साथ घातक (Malignant) ट्यूमर में परिवर्तित हो सकते हैं।

प्रमुख लक्षण

  • मल त्याग की आदतों में बदलाव
  • लगातार कब्ज या दस्त
  • मल में रक्त आना
  • पेट में दर्द या ऐंठन
  • वजन का अचानक कम होना
  • अत्यधिक थकान
  • एनीमिया

प्रारंभिक अवस्था में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, जिसके कारण रोग का निदान देर से होता है।

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स क्या होते हैं?

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स (Ultra-Processed Foods) वे खाद्य पदार्थ हैं जिन्हें औद्योगिक स्तर पर कई चरणों में संसाधित किया जाता है और जिनमें अनेक कृत्रिम या संशोधित घटक मिलाए जाते हैं।

इनमें अक्सर शामिल होते हैं:

  • परिष्कृत स्टार्च (Refined Starches)
  • उच्च फ्रक्टोज कॉर्न सिरप (HFCS)
  • कृत्रिम स्वाद (Artificial Flavors)
  • कृत्रिम रंग (Artificial Colors)
  • इमल्सीफायर (Emulsifiers)
  • संरक्षक (Preservatives)
  • हाइड्रोजेनेटेड वसा
  • अतिरिक्त नमक और चीनी

सामान्य उदाहरण

  • प्रोसेस्ड मीट
  • इंस्टेंट नूडल्स
  • पैकेट स्नैक्स
  • चिप्स
  • सॉफ्ट ड्रिंक्स
  • शर्करायुक्त पेय
  • फ्रोजन रेडी-टू-ईट भोजन
  • प्रोसेस्ड बर्गर और सॉसेज
  • पैकेटबंद मिठाइयां

अध्ययन कैसे किया गया?

यह शोध अमेरिका के तीन प्रतिष्ठित दीर्घकालिक स्वास्थ्य अध्ययनों पर आधारित था:

  • Health Professionals Follow-Up Study
  • Nurses' Health Study
  • Nurses' Health Study II

अध्ययन में कुल:

  • 46,341 पुरुष

  • 159,907 महिलाएं

शामिल थीं।

प्रतिभागियों के भोजन संबंधी डेटा को हर चार वर्ष में Food Frequency Questionnaire के माध्यम से एकत्रित किया गया और 24 से 28 वर्षों तक उनका स्वास्थ्य अनुवर्ती किया गया।

इस अवधि में:

  • 3,216 कोलोरेक्टल कैंसर के मामले दर्ज हुए
  • पुरुषों में 1,294 मामले
  • महिलाओं में 1,922 मामले

सामने आए।

अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष

शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन पुरुषों द्वारा सबसे अधिक मात्रा में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन किया गया, उनमें कोलोरेक्टल कैंसर विकसित होने का जोखिम सबसे कम सेवन करने वालों की तुलना में 29 प्रतिशत अधिक था।

विशेष रूप से:

  • डिस्टल कोलन कैंसर (Distal Colon Cancer) का जोखिम 72% तक अधिक पाया गया।
  • प्रोसेस्ड मीट आधारित रेडी-टू-ईट उत्पादों से जोखिम में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।
  • शर्करायुक्त पेय पदार्थ (Sugar-Sweetened Beverages) भी जोखिम से जुड़े पाए गए।

महिलाओं में कुल अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड सेवन और कैंसर के बीच स्पष्ट संबंध नहीं पाया गया, लेकिन कुछ विशेष श्रेणियों के रेडी-टू-ईट भोजन में जोखिम बढ़ा हुआ देखा गया।

रोचक रूप से, दही और डेयरी आधारित कुछ उत्पाद महिलाओं में जोखिम कम करने से जुड़े पाए गए।

कैंसर का जोखिम क्यों बढ़ सकता है?

वैज्ञानिकों का मानना है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स कई जैविक प्रक्रियाओं के माध्यम से कैंसर के विकास को प्रोत्साहित कर सकते हैं।

1. दीर्घकालिक सूजन (Chronic Inflammation)

अत्यधिक प्रसंस्कृत भोजन शरीर में निम्न-स्तरीय दीर्घकालिक सूजन उत्पन्न कर सकता है। यह सूजन कैंसरजनन (Carcinogenesis) की महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है।

2. आंतों के माइक्रोबायोम में बदलाव

आंतों में रहने वाले लाभकारी जीवाणुओं का संतुलन बिगड़ने से:

  • सूजन बढ़ती है
  • प्रतिरक्षा प्रणाली प्रभावित होती है
  • कैंसरकारी प्रक्रियाएं सक्रिय हो सकती हैं

3. रासायनिक योजक (Food Additives)

कुछ इमल्सीफायर, संरक्षक और कृत्रिम रसायन आंतों की म्यूकोसल परत (Intestinal Mucosal Barrier) को प्रभावित कर सकते हैं।

4. मोटापा और इंसुलिन प्रतिरोध

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन:

  • मोटापा
  • इंसुलिन प्रतिरोध
  • मेटाबोलिक सिंड्रोम

का कारण बन सकता है, जो स्वयं कोलोरेक्टल कैंसर के स्थापित जोखिम कारक हैं।

5. प्रोसेस्ड मीट में कार्सिनोजेन्स

प्रसंस्कृत मांस में उपस्थित:

  • नाइट्राइट्स
  • नाइट्रोसामाइन्स
  • पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन्स

जैसे यौगिक कैंसरकारी (Carcinogenic) प्रभाव उत्पन्न कर सकते हैं।

क्या सभी प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ खतरनाक हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार सभी प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ समान रूप से हानिकारक नहीं होते।

उदाहरण:

  • पाश्चुरीकृत दूध
  • दही
  • जमे हुए फल एवं सब्जियां

तकनीकी रूप से प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ हैं, लेकिन इन्हें अल्ट्रा-प्रोसेस्ड श्रेणी में नहीं रखा जाता।

जो खाद्य पदार्थ अत्यधिक परिष्कृत, कृत्रिम योजकों से भरपूर और पोषण की दृष्टि से कमजोर होते हैं, वे अधिक चिंता का विषय हैं।

जोखिम कम करने के उपाय

विशेषज्ञ निम्न जीवनशैली अपनाने की सलाह देते हैं:

प्राकृतिक भोजन को प्राथमिकता दें

  • ताजे फल
  • हरी सब्जियां
  • साबुत अनाज
  • दालें
  • मेवे

प्रोसेस्ड मीट सीमित करें

  • सॉसेज

  • सलामी

  • बेकन

  • प्रोसेस्ड चिकन उत्पाद

का सेवन कम करें।

फाइबर बढ़ाएं

उच्च फाइबर युक्त भोजन कोलोरेक्टल कैंसर के जोखिम को कम करने में सहायक माना जाता है।

नियमित व्यायाम करें

कम से कम 150 मिनट प्रति सप्ताह मध्यम शारीरिक गतिविधि करें।

स्वस्थ वजन बनाए रखें

मोटापा कोलोरेक्टल कैंसर का एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है।

नियमित स्क्रीनिंग कराएं

50 वर्ष की आयु के बाद या उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों में चिकित्सकीय सलाह अनुसार:

  • कोलोनोस्कोपी
  • फीकल ऑकल्ट ब्लड टेस्ट
  • अन्य स्क्रीनिंग परीक्षण

कराना लाभदायक हो सकता है।

निष्कर्ष

ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित यह दीर्घकालिक अध्ययन संकेत देता है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स का अत्यधिक सेवन, विशेष रूप से पुरुषों में, कोलोरेक्टल कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है। यद्यपि यह अध्ययन प्रत्यक्ष कारण-परिणाम संबंध सिद्ध नहीं करता, फिर भी इसके निष्कर्ष आधुनिक आहार पैटर्न और कैंसर जोखिम के बीच संभावित संबंधों की ओर गंभीर संकेत देते हैं। स्वस्थ, प्राकृतिक और फाइबर-समृद्ध आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि तथा समय पर जांच कैंसर की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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