सर्जरी के दौरान अधिक ऑक्सीजन देना: क्या यह लाभ से अधिक नुकसान पहुंचा सकता है?

Swadeshi Health
0

बड़े अमेरिकी अध्ययन में किडनी, हृदय और फेफड़ों की चोट के बढ़े जोखिम के संकेत

स्वास्थ्य शोध विश्लेषण | स्वदेशी हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट

लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि सर्जरी के दौरान रोगी को अधिक ऑक्सीजन देना सुरक्षित और लाभकारी होता है। ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया के प्रभाव में रहने वाले मरीजों में पर्याप्त ऑक्सीजन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए चिकित्सक सामान्य वायुमंडलीय स्तर (21%) से कहीं अधिक ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। हालांकि, British Medical Journal (BMJ) में प्रकाशित एक बड़े बहु-केंद्रित अध्ययन ने इस धारणा पर महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं।


अध्ययन के अनुसार, सर्जरी के दौरान अत्यधिक या सुप्राफिजियोलॉजिकल ऑक्सीजन देने से ऑपरेशन के बाद तीव्र गुर्दा क्षति (Acute Kidney Injury), मायोकार्डियल इंजरी (Myocardial Injury) और फेफड़ों की चोट (Lung Injury) का जोखिम बढ़ सकता है। यह निष्कर्ष आधुनिक पेरिऑपरेटिव चिकित्सा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अध्ययन की पृष्ठभूमि

ऑपरेशन के दौरान अतिरिक्त ऑक्सीजन देने का उद्देश्य शरीर के ऊतकों में ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना तथा संक्रमण और जटिलताओं के जोखिम को कम करना होता है। लेकिन हाल के वर्षों में वैज्ञानिकों ने यह जांचना शुरू किया कि क्या आवश्यकता से अधिक ऑक्सीजन वास्तव में शरीर के लिए हानिकारक हो सकती है। अत्यधिक ऑक्सीजन के कारण उत्पन्न होने वाली स्थिति को हाइपरऑक्सिया (Hyperoxia) कहा जाता है, जिसमें शरीर के ऊतकों में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य आवश्यकता से अधिक हो जाता है। हाइपरऑक्सिया से ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, सूजन और कोशिकीय क्षति की संभावना बढ़ सकती है।

अध्ययन कैसे किया गया?

यह एक ऑब्जर्वेशनल कोहोर्ट अध्ययन था, जिसमें अमेरिका के 42 चिकित्सा केंद्रों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।

अध्ययन की प्रमुख विशेषताएं

  • कुल प्रतिभागी: 3,50,647 वयस्क मरीज
  • औसत आयु: 59 वर्ष
  • महिलाएं: 51.5%
  • अध्ययन अवधि: जनवरी 2016 से नवंबर 2018
  • सभी मरीजों की सर्जरी कम से कम 120 मिनट की थी
  • सभी रोगियों को जनरल एनेस्थीसिया और एंडोट्रेकियल इंट्यूबेशन दिया गया था

शोधकर्ताओं ने ऑपरेशन के दौरान दी गई ऑक्सीजन की मात्रा और उसके बाद होने वाली अंग-क्षति के बीच संबंध का विश्लेषण किया।

सुप्राफिजियोलॉजिकल ऑक्सीजन क्या है?

सामान्य वातावरण में हम लगभग 21% ऑक्सीजन युक्त वायु में सांस लेते हैं। सर्जरी के दौरान अक्सर 50% से 100% तक ऑक्सीजन दी जाती है। जब रोगी के रक्त में ऑक्सीजन संतृप्ति पहले से ही पर्याप्त हो और फिर भी अतिरिक्त ऑक्सीजन दी जाए, तो इसे सुप्राफिजियोलॉजिकल ऑक्सीजन प्रशासन कहा जाता है। अध्ययन में मरीजों को औसतन 54% ऑक्सीजन दी गई, जो सामान्य वायुमंडलीय स्तर से काफी अधिक थी।

अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष

तीव्र गुर्दा क्षति (Acute Kidney Injury)

अध्ययन में लगभग 6.5% मरीजों में ऑपरेशन के बाद तीव्र गुर्दा क्षति विकसित हुई। जिन मरीजों को अधिक ऑक्सीजन दी गई, उनमें तीव्र गुर्दा क्षति का जोखिम 26% अधिक पाया गया।

गुर्दों की सूक्ष्म रक्तवाहिकाएं ऑक्सीडेटिव तनाव के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होती हैं, जिसके कारण उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।

मायोकार्डियल इंजरी (Myocardial Injury)

लगभग 2.8% मरीजों में हृदय की मांसपेशियों को क्षति के संकेत पाए गए। अधिक ऑक्सीजन प्राप्त करने वाले रोगियों में मायोकार्डियल इंजरी का जोखिम 12% अधिक था।

मायोकार्डियल इंजरी हृदय कोशिकाओं की सूक्ष्म क्षति को दर्शाती है और भविष्य में गंभीर हृदय रोगों का संकेत हो सकती है।

फेफड़ों की चोट (Lung Injury)

लगभग 4.4% मरीजों में फेफड़ों से संबंधित जटिलताएं विकसित हुईं। अत्यधिक ऑक्सीजन प्राप्त करने वाले रोगियों में फेफड़ों की चोट का जोखिम 14% अधिक पाया गया।

हाइपरऑक्सिया फेफड़ों के ऊतकों में सूजन और एल्वियोलर क्षति को बढ़ावा दे सकता है।

अत्यधिक ऑक्सीजन शरीर को कैसे नुकसान पहुंचा सकती है?

अधिक ऑक्सीजन से शरीर में रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज़ (Reactive Oxygen Species - ROS) का निर्माण बढ़ सकता है। ये अत्यधिक प्रतिक्रियाशील अणु कोशिकाओं, प्रोटीन, डीएनए और ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हाइपरऑक्सिया शरीर में सूजन पैदा करने वाले रासायनिक मध्यस्थों को सक्रिय कर सकता है, जिससे ऊतकों की क्षति बढ़ सकती है। अत्यधिक ऑक्सीजन रक्तवाहिकाओं के संकुचन का कारण बन सकती है, जिससे कुछ अंगों तक रक्त प्रवाह कम हो सकता है। लगातार उच्च ऑक्सीजन स्तर कोशिकीय झिल्ली और माइटोकॉन्ड्रिया की कार्यक्षमता को भी प्रभावित कर सकता है।

क्या अधिक ऑक्सीजन हमेशा लाभदायक नहीं होती?

आधुनिक चिकित्सा में अब यह अवधारणा मजबूत हो रही है कि "जितनी जरूरत उतनी ऑक्सीजन" सबसे सुरक्षित रणनीति हो सकती है। केवल ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि रोगी की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार ऑक्सीजन देना अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अध्ययन की सीमाएं

यह एक ऑब्जर्वेशनल अध्ययन था, इसलिए यह प्रत्यक्ष कारण-और-प्रभाव संबंध सिद्ध नहीं करता। कुछ अप्रत्यक्ष या अवशिष्ट कारक परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। फिर भी अध्ययन का विशाल आकार और विभिन्न विश्लेषणों में समान निष्कर्ष प्राप्त होना इसके महत्व को बढ़ाता है।

निष्कर्ष

अमेरिका के 42 चिकित्सा केंद्रों में किए गए इस बड़े अध्ययन से संकेत मिलता है कि सर्जरी के दौरान आवश्यकता से अधिक ऑक्सीजन देने से ऑपरेशन के बाद किडनी, हृदय और फेफड़ों की चोट का जोखिम बढ़ सकता है। यद्यपि इन निष्कर्षों की पुष्टि के लिए और नियंत्रित अध्ययन आवश्यक हैं, फिर भी यह शोध हाइपरऑक्सिया के संभावित दुष्प्रभावों की ओर ध्यान आकर्षित करता है। आधुनिक पेरिऑपरेटिव चिकित्सा में अब संतुलित और लक्ष्य-आधारित ऑक्सीजन थेरेपी को अधिक महत्व दिया जा रहा है।

Post a Comment

0 Comments
Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Out
Ok, Go it!
To Top