कृत्रिम मिठास (Artificial Sweeteners) और हृदय रोग का बढ़ता जोखिम

Swadeshi Health
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फ्रांस के एक बड़े अध्ययन से मिले महत्वपूर्ण संकेत

स्वास्थ्य शोध विश्लेषण | स्वदेशी हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट

हाल के वर्षों में कृत्रिम मिठास (Artificial Sweeteners) का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इन्हें कम कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों, डाइट पेय पदार्थों, शुगर-फ्री उत्पादों और मधुमेह रोगियों के लिए बनाए गए खाद्य पदार्थों में व्यापक रूप से प्रयोग किया जाता है। इन्हें लंबे समय तक चीनी के सुरक्षित विकल्प के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन हाल ही में प्रकाशित एक बड़े फ्रांसीसी अध्ययन ने इनके स्वास्थ्य प्रभावों पर नए प्रश्न खड़े किए हैं। 


British Medical Journal (BMJ) में प्रकाशित NutriNet-Santé Cohort Study के अनुसार, कृत्रिम मिठास का अधिक सेवन करने वाले व्यक्तियों में हृदय एवं रक्तवाहिका रोगों (Cardiovascular Diseases) का जोखिम बढ़ा हुआ पाया गया। विशेष रूप से एस्पार्टेम (Aspartame), एसेसल्फेम-पोटैशियम (Acesulfame Potassium) और सुक्रालोज़ (Sucralose) जैसे स्वीटनर्स कुछ प्रकार के हृदय रोगों और स्ट्रोक के बढ़े हुए जोखिम से जुड़े पाए गए।

अध्ययन की प्रमुख विशेषताएं

  • 1,03,388 वयस्क प्रतिभागियों को शामिल किया गया।
  • औसत आयु 42.2 वर्ष थी।
  • लगभग 80% प्रतिभागी महिलाएं थीं।
  • अध्ययन 2009 से 2021 तक चला।
  • आहार संबंधी जानकारी बार-बार 24 घंटे के विस्तृत खाद्य रिकॉर्ड के माध्यम से एकत्रित की गई।
  • पेय पदार्थों, डेयरी उत्पादों, टेबल-टॉप स्वीटनर्स और अन्य प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में मौजूद कृत्रिम मिठास का विश्लेषण किया गया।

कृत्रिम मिठास क्या हैं?

कृत्रिम मिठास ऐसे यौगिक हैं जो चीनी की तुलना में कई गुना अधिक मीठे होते हैं, लेकिन बहुत कम या लगभग शून्य कैलोरी प्रदान करते हैं। इनका उपयोग स्वाद बनाए रखते हुए कैलोरी सेवन कम करने के उद्देश्य से किया जाता है।

सबसे सामान्य कृत्रिम स्वीटनर्स हैं:

  • एस्पार्टेम (Aspartame)
  • एसेसल्फेम-पोटैशियम (Acesulfame-K)
  • सुक्रालोज़ (Sucralose)

अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष

अध्ययन में पाया गया कि कृत्रिम मिठास का अधिक सेवन करने वाले लोगों में हृदय रोगों का जोखिम लगभग 9% अधिक था। इसके अतिरिक्त, मस्तिष्क की रक्तवाहिकाओं से संबंधित रोगों, विशेष रूप से स्ट्रोक, का जोखिम 18% तक अधिक देखा गया।

एस्पार्टेम का सेवन करने वाले व्यक्तियों में स्ट्रोक जैसी सेरेब्रोवैस्कुलर घटनाओं का जोखिम बढ़ा हुआ पाया गया। वहीं एसेसल्फेम-पोटैशियम और सुक्रालोज़ का संबंध कोरोनरी हृदय रोग (Coronary Heart Disease) के बढ़े हुए जोखिम से देखा गया।

संभावित जैविक कारण

वैज्ञानिकों का मानना है कि कृत्रिम मिठास कई जैविक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती हैं।

आंत माइक्रोबायोटा में परिवर्तन

कृत्रिम स्वीटनर्स आंतों में रहने वाले लाभकारी सूक्ष्मजीवों के संतुलन को बदल सकते हैं। इससे चयापचय संबंधी विकार, सूजन और इंसुलिन प्रतिरोध जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

एंडोथेलियल डिसफंक्शन

रक्तवाहिकाओं की आंतरिक परत (Endothelium) की कार्यक्षमता प्रभावित होने पर धमनियों में कठोरता और एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) का जोखिम बढ़ सकता है।

ग्लूकोज और इंसुलिन चयापचय

कुछ शोधों में पाया गया है कि कृत्रिम मिठास शरीर की ग्लूकोज सहिष्णुता (Glucose Tolerance) और इंसुलिन संवेदनशीलता (Insulin Sensitivity) को प्रभावित कर सकती हैं।

दीर्घकालिक सूजन

क्रोनिक निम्न-स्तरीय सूजन (Chronic Low-Grade Inflammation) हृदय रोगों और रक्तवाहिका विकारों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

क्या कृत्रिम मिठास पूरी तरह असुरक्षित हैं?

यह अध्ययन एक प्रॉस्पेक्टिव कोहोर्ट अध्ययन था, इसलिए यह केवल संबंध (Association) दर्शाता है, प्रत्यक्ष कारण (Causation) नहीं। फिर भी इसके निष्कर्ष इतने महत्वपूर्ण हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), यूरोपीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण (EFSA) और अन्य नियामक संस्थाएं कृत्रिम मिठास की दीर्घकालिक सुरक्षा का पुनर्मूल्यांकन कर रही हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह

विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक चीनी और अत्यधिक कृत्रिम मिठास दोनों ही स्वास्थ्य के लिए आदर्श विकल्प नहीं हैं। बेहतर स्वास्थ्य के लिए निम्न उपाय उपयोगी माने जाते हैं:

  • ताजे फल और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों का सेवन
  • मीठे पेय पदार्थों का सीमित उपयोग
  • अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से परहेज
  • संतुलित एवं पौष्टिक आहार
  • नियमित शारीरिक गतिविधि
  • स्वस्थ वजन बनाए रखना

निष्कर्ष

फ्रांस के इस बड़े अध्ययन से संकेत मिलता है कि कृत्रिम मिठास, विशेषकर एस्पार्टेम, एसेसल्फेम-पोटैशियम और सुक्रालोज़, का अधिक सेवन हृदय रोगों और स्ट्रोक के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा हो सकता है। यद्यपि इस संबंध की पुष्टि के लिए और अनुसंधान आवश्यक हैं, फिर भी यह अध्ययन इस बात पर बल देता है कि "शुगर-फ्री" का अर्थ हमेशा "जोखिम-मुक्त" नहीं होता। दीर्घकालिक हृदय स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक, कम प्रसंस्कृत और संतुलित आहार को प्राथमिकता देना अधिक लाभकारी माना जाता है।

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