दुनिया भर में मोटापा, डायबिटीज और खराब जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। अब इन बीमारियों का सबसे बड़ा असर हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक, लिवर पर दिखाई दे रहा है। प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल द लैंसेट गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी एंड हेपेटोलॉजी में प्रकाशित एक नई वैश्विक स्टडी ने चेतावनी दी है कि वर्ष 2050 तक लगभग 180 करोड़ लोग मेटाबॉलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) से प्रभावित हो सकते हैं। यह संख्या आज की तुलना में बेहद चिंताजनक है और संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में फैटी लिवर एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकता है।
क्या है MASLD?
MASLD को पहले नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) कहा जाता था। नाम बदलने का उद्देश्य बीमारी के वास्तविक कारणों को बेहतर ढंग से दर्शाना था। यह ऐसी स्थिति है जिसमें बिना अत्यधिक शराब सेवन के भी लिवर की कोशिकाओं में वसा (फैट) जमा होने लगती है। शुरुआती अवस्था में यह समस्या अक्सर बिना किसी लक्षण के रहती है, लेकिन समय के साथ लिवर में सूजन (इन्फ्लेमेशन), ऊतकों का क्षतिग्रस्त होना, फाइब्रोसिस, सिरोसिस और यहां तक कि लिवर कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।
चौंकाने वाले आंकड़े
वैश्विक अध्ययन के अनुसार:
- वर्ष 1990 में लगभग 50 करोड़ लोग MASLD से प्रभावित थे।
- वर्ष 2023 तक यह संख्या बढ़कर 130 करोड़ तक पहुंच गई।
- वर्ष 2050 तक इसके 180 करोड़ मामलों तक पहुंचने का अनुमान है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि केवल जनसंख्या बढ़ने के कारण नहीं, बल्कि बदलती जीवनशैली और मेटाबॉलिक रोगों के प्रसार का परिणाम है।
किन कारणों से तेजी से बढ़ रहा है खतरा?
शोधकर्ताओं ने 1990 से 2023 के बीच 204 देशों और क्षेत्रों के स्वास्थ्य आंकड़ों का विश्लेषण किया। अध्ययन में तीन प्रमुख जोखिम कारकों को MASLD के बढ़ते मामलों के लिए जिम्मेदार पाया गया।
1. धूम्रपान: सिर्फ फेफड़ों नहीं, लिवर का भी दुश्मन
अधिकतर लोग धूम्रपान को फेफड़ों और हृदय रोगों से जोड़ते हैं, लेकिन इसका असर लिवर पर भी गंभीर रूप से पड़ता है।
सिगरेट के धुएं में मौजूद विषैले तत्व शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाते हैं। इससे:
- इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है
- लिपिड मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है
- शरीर में क्रोनिक इन्फ्लेमेशन बढ़ती है
- लिवर कोशिकाओं में फैट जमा होने लगता है
इन सभी प्रभावों के कारण MASLD विकसित होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
2. बढ़ता वजन और हाई BMI
मोटापा आज दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में गिना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार जिन लोगों का BMI 30 या उससे अधिक होता है, उनमें लिवर में फैट जमा होने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। विशेष रूप से पेट के आसपास जमा चर्बी (Abdominal Obesity) सबसे अधिक नुकसान पहुंचाती है।
अधिक वजन वाले लोगों में अक्सर:
- इंसुलिन रेजिस्टेंस
- प्रीडायबिटीज
- टाइप-2 डायबिटीज
- हाई ट्राइग्लिसराइड्स
जैसी समस्याएं भी मौजूद रहती हैं, जो लिवर को लगातार नुकसान पहुंचाती हैं।
3. हाई फास्टिंग ब्लड शुगर
यदि आपका फास्टिंग ब्लड शुगर स्तर 100 mg/dL से अधिक रहता है, तो यह चेतावनी का संकेत हो सकता है। जब शरीर ग्लूकोज को प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाता, तब अतिरिक्त शर्करा फैट में बदलकर लिवर में जमा होने लगती है। समय के साथ यह जमा वसा सूजन और लिवर क्षति का कारण बन सकती है। डायबिटीज और फैटी लिवर के बीच का संबंध इतना मजबूत है कि दोनों बीमारियां अक्सर एक-दूसरे को बढ़ावा देती हैं।
कौन लोग हैं सबसे ज्यादा जोखिम में?
दिल्ली स्थित श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी एवं हेपेटोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. जी. एस. लांबा के अनुसार MASLD का सीधा संबंध आधुनिक जीवनशैली और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य से है।
निम्नलिखित लोगों में इसका जोखिम अधिक पाया जाता है:
- मोटापे से ग्रसित व्यक्ति
- टाइप-2 डायबिटीज के मरीज
- हाई कोलेस्ट्रॉल वाले लोग
- हाई ब्लड प्रेशर के मरीज
- लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोग
- शारीरिक गतिविधि की कमी वाले व्यक्ति
- अत्यधिक प्रोसेस्ड और जंक फूड खाने वाले लोग
- पेट के आसपास अधिक चर्बी रखने वाले लोग
विशेषज्ञों का कहना है कि अब यह बीमारी केवल मध्यम आयु वर्ग तक सीमित नहीं रही। युवाओं और किशोरों में भी फैटी लिवर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
शुरुआती लक्षण जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए
MASLD अक्सर "साइलेंट डिजीज" कहलाती है क्योंकि शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते।
हालांकि कुछ लोगों में निम्न संकेत दिखाई दे सकते हैं:
- लगातार थकान
- कमजोरी
- पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में असहजता
- वजन बढ़ना
- ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
- भूख में कमी
इन लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज करना आगे चलकर गंभीर परिणाम दे सकता है।
क्या MASLD पूरी तरह ठीक हो सकती है?
अच्छी बात यह है कि शुरुआती अवस्था में फैटी लिवर को काफी हद तक उल्टा (Reverse) किया जा सकता है। अध्ययनों से पता चला है कि शरीर के कुल वजन का केवल 7–10 प्रतिशत कम करने से लिवर में जमा वसा और सूजन में उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है।
बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय
वजन नियंत्रित रखें
धीरे-धीरे और स्वस्थ तरीके से वजन कम करें। अचानक वजन घटाना भी लिवर के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
संतुलित आहार लें
- साबुत अनाज
- हरी सब्जियां
- फल
- दालें
- नट्स और बीज
को भोजन में शामिल करें।
चीनी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट कम करें
सॉफ्ट ड्रिंक, मिठाइयां, सफेद ब्रेड, बिस्कुट और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से दूरी बनाएं।
नियमित व्यायाम करें
सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि करें।
धूम्रपान छोड़ें
स्मोकिंग बंद करने से केवल फेफड़ों ही नहीं बल्कि लिवर की सेहत में भी सुधार आता है।
नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं
- लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT)
- ब्लड शुगर
- HbA1c
- लिपिड प्रोफाइल
- अल्ट्रासाउंड
जैसी जांचें समय-समय पर करवाते रहें।
निष्कर्ष
MASLD आने वाले दशकों की सबसे बड़ी मेटाबॉलिक बीमारियों में से एक बन सकती है। यदि वर्तमान रुझान जारी रहे तो 2050 तक लगभग 180 करोड़ लोग इसकी चपेट में आ सकते हैं। अच्छी बात यह है कि यह बीमारी काफी हद तक जीवनशैली से जुड़ी है, इसलिए सही खानपान, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण और समय पर जांच के जरिए इसके जोखिम को काफी कम किया जा सकता है।
यदि आपको मोटापा, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल या हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं हैं, तो यह आपके लिवर की जांच करवाने का सही समय हो सकता है। स्वस्थ लिवर ही स्वस्थ जीवन की नींव है।
