दिल का दौरा (Myocardial Infarction) आज भी दुनिया भर में मृत्यु और विकलांगता का एक प्रमुख कारण है। आधुनिक चिकित्सा ने एंजियोप्लास्टी, स्टेंट और प्रभावी दवाओं के माध्यम से दिल के दौरे के बाद मरीजों की जान बचाने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। फिर भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है—हार्ट फेल्योर (Heart Failure)। दिल का दौरा पड़ने के बाद क्षतिग्रस्त हृदय मांसपेशियां पूरी तरह ठीक नहीं हो पातीं, जिससे समय के साथ हृदय की पंपिंग क्षमता कमजोर होने लगती है।
![]() |
| वैज्ञानिकों का मानना है कि मानव स्टेम सेल थेरेपी भविष्य में उन मरीजों के लिए नई आशा बन सकती है, जिनका हृदय दिल के दौरे के बाद कमजोर पड़ गया है। (प्रतीकात्मक चित्र | स्रोत: थिंकस्टॉक इमेजेज) |
हाल ही में प्रकाशित एक बड़े फेज-3 रैंडमाइज्ड क्लिनिकल ट्रायल ने इस दिशा में नई आशा जगाई है। अध्ययन के अनुसार, दिल के दौरे के 3 से 7 दिनों के भीतर गर्भनाल (Umbilical Cord) से प्राप्त व्हार्टन जेली मेसेनकाइमल स्टेम सेल्स (Wharton's Jelly Mesenchymal Stem Cells – WJ-MSCs) को कोरोनरी धमनी के माध्यम से देने पर हार्ट फेल्योर का जोखिम उल्लेखनीय रूप से कम हो सकता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह उपचार भविष्य में हृदय पुनर्जनन चिकित्सा (Cardiac Regenerative Medicine) का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।
दिल का दौरा और हार्ट फेल्योर का संबंध
जब हृदय की किसी कोरोनरी धमनी में अचानक रुकावट उत्पन्न हो जाती है, तब हृदय की मांसपेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती और उनकी कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं। इसी स्थिति को दिल का दौरा या मायोकार्डियल इन्फ्रैक्शन कहा जाता है। हालांकि एंजियोप्लास्टी द्वारा अवरुद्ध धमनी को जल्दी खोल दिया जाता है, फिर भी क्षतिग्रस्त मांसपेशियों का एक हिस्सा स्थायी रूप से कमजोर हो सकता है। परिणामस्वरूप हृदय शरीर की जरूरत के अनुसार रक्त पंप नहीं कर पाता और धीरे-धीरे हार्ट फेल्योर विकसित हो सकता है।
हार्ट फेल्योर के मरीजों में आमतौर पर:
- सांस फूलना (Dyspnea)
- अत्यधिक थकान (Fatigue)
- पैरों में सूजन (Peripheral Edema)
- व्यायाम सहनशीलता में कमी
- बार-बार अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता
जैसी समस्याएं देखी जाती हैं।
यही कारण है कि वैज्ञानिक लंबे समय से ऐसी तकनीकों की तलाश कर रहे हैं जो क्षतिग्रस्त हृदय ऊतकों की मरम्मत कर सकें।
अध्ययन कैसे किया गया?
यह एक Phase III Randomized Clinical Trial था, जिसे ईरान के शिराज़ शहर के तीन प्रमुख हृदय केंद्रों में संचालित किया गया।
अध्ययन में उन मरीजों को शामिल किया गया जिन्हें:
- पहली बार STEMI (ST-Elevation Myocardial Infarction) हुआ था।
- प्राथमिक एंजियोप्लास्टी (Primary PCI) सफलतापूर्वक की गई थी।
- लेफ्ट वेंट्रिकुलर इजेक्शन फ्रैक्शन (LVEF) 40% से कम था।
कुल 420 मरीजों को दो समूहों में विभाजित किया गया:
हस्तक्षेप समूह (Intervention Group)
140 मरीज (अंतिम विश्लेषण में 136)
नियंत्रण समूह (Control Group)
280 मरीज (अंतिम विश्लेषण में 260)
दोनों समूहों को मानक उपचार दिया गया। इसके अतिरिक्त हस्तक्षेप समूह को दिल का दौरा पड़ने के 3–7 दिनों के भीतर Wharton's Jelly MSCs का Intracoronary Infusion दिया गया।
मरीजों का औसतन 33 महीनों तक अनुवर्ती मूल्यांकन (Follow-up) किया गया।
प्रमुख परिणाम
| अंत बिंदु (Endpoint) | हस्तक्षेप समूह (प्रति 100 व्यक्ति-वर्ष) | नियंत्रण समूह (प्रति 100 व्यक्ति-वर्ष) | HR | 95% CI | P Value |
|---|---|---|---|---|---|
| हृदय विफलता की घटना (Primary Endpoint) | 2.77 | 6.48 | 0.43 | 0.21–0.89 | 0.024 |
| हृदय विफलता के लिए पुनः भर्ती | 0.92 | 4.20 | 0.22 | 0.06–0.74 | 0.015 |
| समग्र अंत बिंदु (CV Mortality + HF/MI Readmission) | 2.80 | 7.16 | 0.39 | 0.19–0.82 | 0.012 |
| MI के लिए पुनः भर्ती | 1.23 | 3.06 | 0.40 | 0.14–1.19 | 0.10 (NS) |
| सभी कारणों से मृत्यु दर | 1.81 | 1.66 | 1.10 | 0.40–3.02 | 0.86 (NS) |
| हृदय संबंधी मृत्यु दर | 0.91 | 1.33 | 0.68 | 0.18–2.57 | 0.57 (NS) |
नोट: NS (Not Significant) का अर्थ है कि परिणाम सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण नहीं था।
परिणामों का क्या अर्थ है?
- अध्ययन के आंकड़े बताते हैं कि स्टेम सेल थेरेपी प्राप्त करने वाले मरीजों में हार्ट फेल्योर विकसित होने का जोखिम लगभग 57% कम था।
- सबसे उल्लेखनीय परिणाम हार्ट फेल्योर के कारण दोबारा अस्पताल में भर्ती होने के मामलों में देखा गया, जहां लगभग 78% की कमी दर्ज की गई।
- इसके अतिरिक्त, हृदय संबंधी मृत्यु और पुनः भर्ती को मिलाकर बनाए गए संयुक्त (Composite) परिणाम में लगभग 61% की कमी देखी गई।
हालांकि अध्ययन में दोबारा दिल का दौरा पड़ने, कुल मृत्यु दर या केवल हृदय संबंधी मृत्यु दर में कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं मिला। इसका अर्थ है कि यह थेरेपी मुख्य रूप से हार्ट फेल्योर की रोकथाम और हृदय कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में प्रभावी दिखाई देती है।
दिल की पंपिंग क्षमता में उल्लेखनीय सुधार
- अध्ययन के छह महीने बाद किए गए इकोकार्डियोग्राफी मूल्यांकन में पाया गया कि स्टेम सेल प्राप्त करने वाले मरीजों की LVEF में औसतन 5.88 प्रतिशत अधिक सुधार हुआ।
- LVEF हृदय की पंपिंग क्षमता का महत्वपूर्ण संकेतक है। इसमें सुधार का अर्थ है कि हृदय अधिक प्रभावी ढंग से रक्त पंप कर पा रहा है।
- वैज्ञानिक दृष्टि से यह परिणाम अत्यंत महत्वपूर्ण था और इसकी सांख्यिकीय पुष्टि भी मजबूत रही (P < 0.001)।
स्टेम सेल कैसे काम करते हैं?
Wharton's Jelly गर्भनाल के भीतर पाया जाने वाला जैली जैसा संयोजी ऊतक है, जिसमें बड़ी मात्रा में Mesenchymal Stem Cells मौजूद होती हैं।
ये कोशिकाएं कई जैविक प्रक्रियाओं के माध्यम से लाभ पहुंचाती हैं:
- सूजन (Inflammation) को कम करती हैं।
- नई रक्त वाहिकाओं (Angiogenesis) के निर्माण को प्रोत्साहित करती हैं।
- हृदय कोशिकाओं को एपोप्टोसिस (Apoptosis) से बचाती हैं।
- ऊतक पुनर्निर्माण (Tissue Repair) को बढ़ावा देती हैं।
- फाइब्रोसिस (Fibrosis) को कम करने में सहायता करती हैं।
विशेष बात यह है कि ये कोशिकाएं कम प्रतिरक्षाजनक (Low Immunogenic) होती हैं, इसलिए इनके उपयोग के लिए जटिल HLA Matching की आवश्यकता नहीं होती।
क्या यह उपचार सुरक्षित है?
- अध्ययन में स्टेम सेल इन्फ्यूजन से संबंधित किसी गंभीर प्रतिकूल प्रभाव (Serious Adverse Event) की सूचना नहीं मिली।
- फिर भी विशेषज्ञ सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। अध्ययन ओपन-लेबल डिजाइन का था, इसलिए भविष्य में डबल-ब्लाइंड और बहु-राष्ट्रीय अध्ययनों की आवश्यकता बनी हुई है।
- साथ ही, दीर्घकालिक सुरक्षा—विशेष रूप से हृदय अतालता (Arrhythmia) या संभावित ट्यूमर जोखिम—का मूल्यांकन अभी जारी है।
क्या मरीज अभी इसका लाभ ले सकते हैं?
- वर्तमान समय में यह उपचार नियमित क्लिनिकल प्रैक्टिस का हिस्सा नहीं है। इसे अभी भी उन्नत शोध एवं क्लिनिकल ट्रायल के दायरे में माना जाता है।
- यदि किसी मरीज को गंभीर STEMI हुआ है और उसकी LVEF 40% से कम है, तो वह अपने कार्डियोलॉजिस्ट से पूछ सकता है कि क्या उसके क्षेत्र में इस प्रकार का कोई स्वीकृत क्लिनिकल ट्रायल उपलब्ध है।
- महत्वपूर्ण बात यह है कि स्टेम सेल थेरेपी एंजियोप्लास्टी, स्टेंट या दवाओं का विकल्प नहीं है, बल्कि भविष्य में इनके साथ उपयोग की जाने वाली एक सहायक (Adjunctive) चिकित्सा बन सकती है।
निष्कर्ष
हृदयाघात के बाद हार्ट फेल्योर की रोकथाम आधुनिक कार्डियोलॉजी की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। यह फेज-3 अध्ययन दर्शाता है कि व्हार्टन जेली से प्राप्त मेसेनकाइमल स्टेम कोशिकाओं का प्रारंभिक इंट्राकोरोनरी इन्फ्यूजन हार्ट फेल्योर के जोखिम को कम कर सकता है, हृदय की पंपिंग क्षमता में सुधार ला सकता है और पुनः अस्पताल भर्ती होने की संभावना को घटा सकता है।
हालांकि इस उपचार को नियमित चिकित्सा पद्धति बनने से पहले और बड़े अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों से गुजरना होगा, फिर भी यह शोध पुनर्जनन चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आने वाले वर्षों में स्टेम सेल आधारित उपचार हृदय रोगियों के लिए नई उम्मीद का आधार बन सकते हैं।
