अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में छिपे E-नंबरों पर एक महत्वपूर्ण अध्ययन
आज के समय में पैकेटबंद खाद्य पदार्थ हमारे दैनिक आहार का सामान्य हिस्सा बन चुके हैं। ब्रेड, बिस्कुट, केक, आइसक्रीम, सॉस, इंस्टेंट नूडल्स, रेडी-टू-ईट भोजन और अनेक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में ऐसे खाद्य योजक (Food Additives) मिलाए जाते हैं जो उनकी बनावट, स्वाद, स्थिरता और शेल्फ लाइफ को बेहतर बनाते हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण केमिकल समूह इमल्सीफायर्स (Emulsifiers) का है।
हाल के वर्षों में वैज्ञानिक समुदाय का ध्यान इस प्रश्न पर केंद्रित हुआ है कि क्या इन योजकों का दीर्घकालिक सेवन केवल खाद्य गुणवत्ता को प्रभावित करता है या यह मानव स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है। इसी संदर्भ में अक्टूबर 2023 में ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (BMJ) में प्रकाशित एक बड़े फ्रांसीसी अध्ययन ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों, पोषण वैज्ञानिकों तथा खाद्य नियामक संस्थाओं का ध्यान आकर्षित किया है। अध्ययन में संकेत मिले हैं कि कुछ सामान्यतः उपयोग किए जाने वाले इमल्सीफायर्स का अधिक सेवन हृदय एवं मस्तिष्क की रक्तवाहिकाओं से संबंधित रोगों के जोखिम को बढ़ा सकता है। फ्रांस के प्रसिद्ध NutriNet-Santé Cohort अध्ययन में 95,442 स्वस्थ वयस्कों (औसत आयु 43.1 वर्ष; लगभग 79 प्रतिशत महिलाएँ) का औसतन 7.4 वर्षों तक अनुवर्तन (Follow-up) किया गया। प्रतिभागियों ने कम-से-कम तीन बार 24 घंटे का विस्तृत आहार रिकॉर्ड प्रस्तुत किया, जिसके आधार पर विभिन्न इमल्सीफायर्स की दैनिक खपत का आकलन किया गया। अध्ययन अवधि के दौरान 1,995 नए हृदयवाहिकीय रोग (Cardiovascular Disease), 1,044 कोरोनरी हृदय रोग तथा 974 मस्तिष्कवाहिकीय रोगों (जैसे स्ट्रोक) के मामले दर्ज किए गए।
यह अध्ययन इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पहली बार इतने बड़े स्तर पर आम खाद्य इमल्सीफायर्स और हृदय रोगों के बीच संभावित संबंध का मूल्यांकन किया गया है। यद्यपि यह अध्ययन कारण और परिणाम (Cause and Effect) को पूर्ण रूप से सिद्ध नहीं करता, फिर भी इसके निष्कर्ष सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चेतावनी के रूप में देखे जा रहे हैं।
इमल्सीफायर्स (Emulsifiers) क्या होते हैं?
इमल्सीफायर्स ऐसे खाद्य योजक हैं जो तेल और पानी जैसे स्वाभाविक रूप से अलग रहने वाले पदार्थों को एक समान मिश्रण में बनाए रखने में सहायता करते हैं। इनके उपयोग से खाद्य पदार्थों की बनावट अधिक मुलायम, आकर्षक और स्थिर बनी रहती है।
उदाहरण के लिए:
- आइसक्रीम में बर्फ के बड़े क्रिस्टल बनने से रोकना
- ब्रेड को अधिक नरम और फूला हुआ बनाए रखना
- सॉस में तेल और पानी को अलग होने से रोकना
- प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की शेल्फ लाइफ बढ़ाना
खाद्य उद्योग में प्रयुक्त अधिकांश इमल्सीफायर्स को E-नंबर द्वारा पहचाना जाता है। यद्यपि इन्हें खाद्य नियामक संस्थाओं द्वारा अनुमोदित किया गया है, लेकिन इनके दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों पर शोध अभी भी जारी है।
अध्ययन में किन इमल्सीफायर्स से जोखिम जुड़ा पाया गया?
शोधकर्ताओं ने उन्नत सांख्यिकीय विश्लेषण (Cox Proportional Hazard Models) का उपयोग करते हुए यह मूल्यांकन किया कि विभिन्न इमल्सीफायर्स के सेवन में वृद्धि के साथ हृदय रोगों का जोखिम कैसे बदलता है। विश्लेषण के दौरान आयु, लिंग, बीएमआई, धूम्रपान, शारीरिक गतिविधि, कुल ऊर्जा सेवन, शराब सेवन तथा पारिवारिक इतिहास जैसे प्रमुख कारकों को नियंत्रित किया गया।
तालिका 1 : प्रमुख इमल्सीफायर्स और उनसे जुड़े संभावित जोखिम
| इमल्सीफायर | E-नंबर | प्रमुख उपयोग | अध्ययन में पाया गया संभावित जोखिम |
|---|---|---|---|
| माइक्रोक्रिस्टलाइन सेल्यूलोज़ | E460 | ब्रेड, बिस्कुट, आइसक्रीम | कुल CVD जोखिम में वृद्धि |
| कार्बोक्सीमिथाइल सेल्यूलोज़ | E466 | सॉस, डेयरी उत्पाद | CVD और कोरोनरी रोग से संबंध |
| मोनो एवं डाइग्लिसराइड्स | E471 | मार्जरीन, बेकरी उत्पाद | विभिन्न हृदयवाहिकीय परिणामों से संबंध |
| लैक्टिक एस्टर ऑफ मोनो/डाइग्लिसराइड्स | E472b | आइसक्रीम, डेज़र्ट | CVD एवं स्ट्रोक जोखिम में वृद्धि |
| साइट्रिक एसिड एस्टर | E472c | बेकरी उत्पाद | CVD एवं कोरोनरी रोग जोखिम में वृद्धि |
| ट्राइसोडियम फॉस्फेट | E339 | प्रोसेस्ड मीट, सॉफ्ट ड्रिंक्स | कोरोनरी हृदय रोग से संबंध |
सेल्यूलोज़ समूह (E460–E468) : क्या कहता है अध्ययन?
जिन लोगों ने सेल्यूलोज़ आधारित इमल्सीफायर्स का अधिक सेवन किया, उनमें समग्र हृदयवाहिकीय रोगों का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक पाया गया।
तालिका 2 : सेल्यूलोज़ समूह से जुड़े प्रमुख निष्कर्ष
| इमल्सीफायर | जोखिम का प्रकार | अनुमानित वृद्धि |
|---|---|---|
| E460 | कुल हृदयवाहिकीय रोग | 5% |
| E460 | कोरोनरी हृदय रोग | 7% |
| E466 | कुल हृदयवाहिकीय रोग | 3% |
| E466 | कोरोनरी हृदय रोग | 4% |
विशेष रूप से E460 (माइक्रोक्रिस्टलाइन सेल्यूलोज़) और E466 (कार्बोक्सीमिथाइल सेल्यूलोज़) के साथ पाए गए संबंध सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण थे, जिससे इन निष्कर्षों की विश्वसनीयता बढ़ती है।
मोनो एवं डाइग्लिसराइड्स समूह (E471–E472) : सबसे अधिक उपयोग होने वाला वर्ग
मोनो एवं डाइग्लिसराइड्स समूह विश्वभर में सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले इमल्सीफायर्स में शामिल है। अध्ययन में इस समूह के कई योजकों और हृदय रोगों के बीच सकारात्मक संबंध पाया गया।
तालिका 3 : E472 समूह से जुड़े प्रमुख निष्कर्ष
| इमल्सीफायर | रोग का प्रकार | अनुमानित जोखिम वृद्धि |
|---|---|---|
| E472b | हृदयवाहिकीय रोग | 6% |
| E472b | मस्तिष्कवाहिकीय रोग (स्ट्रोक आदि) | 11% |
| E472c | हृदयवाहिकीय रोग | 4% |
| E472c | कोरोनरी हृदय रोग | 6% |
विशेष रूप से E472b (लैक्टिक एस्टर ऑफ मोनो एवं डाइग्लिसराइड्स) के साथ मस्तिष्कवाहिकीय रोगों में 11 प्रतिशत तक जोखिम वृद्धि का संबंध पाया गया, जो अध्ययन के सबसे उल्लेखनीय निष्कर्षों में से एक था।
ट्राइसोडियम फॉस्फेट (E339) : एक और चिंता का विषय
ट्राइसोडियम फॉस्फेट (E339) का उपयोग केवल इमल्सीफायर के रूप में ही नहीं, बल्कि पीएच नियंत्रक और स्थिरकारी एजेंट के रूप में भी किया जाता है।
अध्ययन में इसके अधिक सेवन और कोरोनरी हृदय रोग के बीच सकारात्मक संबंध पाया गया। यद्यपि यह संबंध अपेक्षाकृत कमजोर था, फिर भी शोधकर्ताओं ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना है।
ये E-नंबर किन खाद्य पदार्थों में पाए जाते हैं?
अधिकांश लोग इन योजकों का सेवन अनजाने में करते हैं क्योंकि ये बड़ी संख्या में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में मौजूद होते हैं।
तालिका 4 : सामान्य खाद्य स्रोत
| E-नंबर | रासायनिक नाम | सामान्य खाद्य स्रोत |
|---|---|---|
| E460 | माइक्रोक्रिस्टलाइन सेल्यूलोज़ | ब्रेड, बिस्कुट, केक, आइसक्रीम |
| E466 | कार्बोक्सीमिथाइल सेल्यूलोज़ | सॉस, डेयरी उत्पाद, प्रोसेस्ड फूड |
| E471 | मोनो एवं डाइग्लिसराइड्स | मार्जरीन, चॉकलेट, बेकरी उत्पाद |
| E472b | लैक्टिक एस्टर | आइसक्रीम, डेज़र्ट, बेकरी उत्पाद |
| E472c | साइट्रिक एस्टर | बेकरी एवं प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ |
| E339 | ट्राइसोडियम फॉस्फेट | प्रोसेस्ड मीट, सॉफ्ट ड्रिंक, चीज़ उत्पाद |
इसका अर्थ है कि यदि किसी व्यक्ति के आहार में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की मात्रा अधिक है, तो विभिन्न इमल्सीफायर्स का संयुक्त सेवन भी काफी अधिक हो सकता है।
क्या यह अध्ययन अंतिम प्रमाण है?
इस प्रश्न का उत्तर है—नहीं। यह एक पर्यवेक्षणात्मक (Observational) अध्ययन था, जो केवल संबंध (Association) दिखाता है, कारण (Causation) सिद्ध नहीं करता। दूसरे शब्दों में, शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों ने अधिक इमल्सीफायर्स का सेवन किया, उनमें हृदय रोग अधिक दिखाई दिए; लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि रोग केवल इन्हीं योजकों के कारण हुए।
फिर भी, अध्ययन की कुछ महत्वपूर्ण विशेषताएँ इसकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती हैं:
- बहुत बड़ी प्रतिभागी संख्या
- लंबी अनुवर्ती अवधि (7.4 वर्ष)
- विस्तृत आहार रिकॉर्ड
- अनेक संभावित भ्रमित करने वाले कारकों का समायोजन
- संवेदनशीलता विश्लेषणों में भी समान परिणाम
- संभावित जैविक तंत्र : इमल्सीफायर्स नुकसान कैसे पहुँचा सकते हैं?
पिछले कुछ वर्षों में पशु-अध्ययनों और प्रयोगशाला अनुसंधानों ने कुछ संभावित तंत्र सुझाए हैं जिनके माध्यम से इमल्सीफायर्स स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार कुछ इमल्सीफायर्स:
आंत के सूक्ष्मजीव समुदाय (Gut Microbiota) में असंतुलन उत्पन्न कर सकते हैं।
आंत की सुरक्षात्मक श्लेष्मिक परत (Mucus Layer) को प्रभावित कर सकते हैं।
निम्न-स्तरीय दीर्घकालिक सूजन (Low-grade Chronic Inflammation) को बढ़ावा दे सकते हैं।
एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों में चर्बी जमना) की प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं।
रक्त के थक्के बनने की प्रवृत्ति को प्रभावित कर सकते हैं।
हालाँकि मनुष्यों में इन तंत्रों की पूर्ण पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्य इन संभावनाओं की ओर संकेत करते हैं।
स्वास्थ्य की दृष्टि से क्या करें?
इस अध्ययन का उद्देश्य लोगों को डराना नहीं, बल्कि जागरूक बनाना है। कुछ सरल कदम अपनाकर इमल्सीफायर्स के अनावश्यक सेवन को कम किया जा सकता है।
1. पैकेट पलटकर पढ़ें
खरीदारी करते समय सामग्री सूची (Ingredients List) अवश्य पढ़ें। E460, E466, E471, E472b, E472c और E339 जैसे कोडों पर विशेष ध्यान दें।
2. अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ कम करें
ब्रेड, बिस्कुट, रेडीमेड स्नैक्स, इंस्टेंट भोजन और पैकेटबंद मिठाइयों का सेवन सीमित करें।
3. संपूर्ण खाद्य पदार्थ चुनें
ताज़े फल, सब्जियाँ, साबुत अनाज, दालें, मेवे और पारंपरिक घरेलू भोजन बेहतर विकल्प हैं।
4. घर का भोजन प्राथमिकता दें
घर पर तैयार भोजन में खाद्य योजकों की मात्रा नियंत्रित रहती है और पोषण गुणवत्ता बेहतर होती है।
5. रासायनिक नामों को पहचानें
कई बार E-नंबर के स्थान पर पूरा रासायनिक नाम लिखा होता है, जैसे “कार्बोक्सीमिथाइल सेल्यूलोज़” या “मोनो एवं डाइग्लिसराइड्स ऑफ फैटी एसिड्स”।
निष्कर्ष
अक्टूबर 2023 में प्रकाशित यह फ्रांसीसी अध्ययन आधुनिक खाद्य प्रणाली के एक ऐसे पहलू की ओर ध्यान आकर्षित करता है, जिस पर अब तक अपेक्षाकृत कम चर्चा हुई थी। अध्ययन के अनुसार E460, E466, E471, E472b, E472c और E339 जैसे कुछ सामान्य इमल्सीफायर्स का अधिक सेवन हृदयवाहिकीय रोगों, कोरोनरी हृदय रोग तथा मस्तिष्कवाहिकीय रोगों के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा पाया गया।
यद्यपि यह अध्ययन कारण और परिणाम को अंतिम रूप से सिद्ध नहीं करता, फिर भी इसके निष्कर्ष इतने महत्वपूर्ण हैं कि इन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों पर निर्भरता कम करना, लेबल पढ़ने की आदत विकसित करना और प्राकृतिक, कम-प्रसंस्कृत भोजन को प्राथमिकता देना दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं। अगली बार जब आप किसी आकर्षक पैकेटबंद खाद्य पदार्थ को खरीदने जाएँ, तो उसके पीछे लिखे छोटे-छोटे E-नंबरों पर एक नज़र अवश्य डालें। संभव है कि यह छोटी-सी सावधानी आपके हृदय और मस्तिष्क के स्वास्थ्य की बड़ी सुरक्षा बन जाए।
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