लेखक: केसर सिंह
गर्मी का मौसम आते ही थकान, सिरदर्द, चक्कर आना और कमजोरी जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। अधिकांश लोग इन्हें सामान्य मौसमी परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर में अत्यधिक गर्मी या बॉडी हीट (Body Heat) केवल असहजता का कारण नहीं है, बल्कि यह किडनी, हृदय और मस्तिष्क जैसे महत्वपूर्ण अंगों को भी प्रभावित कर सकती है। विशेष रूप से भारत जैसे उष्णकटिबंधीय देशों में, जहां गर्मियों के दौरान तापमान कई क्षेत्रों में 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है, शरीर की तापमान-नियंत्रण प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यदि समय रहते सावधानी न बरती जाए तो यह स्थिति हीट एग्जॉशन (Heat Exhaustion) और आगे चलकर हीट स्ट्रोक (Heat Stroke) जैसी गंभीर चिकित्सा आपात स्थितियों में बदल सकती है।
शरीर का तापमान कैसे नियंत्रित होता है?
सामान्य परिस्थितियों में मानव शरीर का तापमान लगभग 36.5 से 37.5 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। शरीर लगातार गर्मी उत्पन्न करता है और साथ ही उसे बाहर भी निकालता रहता है। पसीना निकलना और त्वचा की रक्त वाहिकाओं का फैलना (Vasodilation) शरीर को ठंडा रखने की प्राकृतिक प्रक्रियाएं हैं। लेकिन जब बाहरी तापमान बहुत अधिक हो, हवा में नमी ज्यादा हो, या शरीर को पर्याप्त पानी न मिले, तो यह संतुलन बिगड़ जाता है। परिणामस्वरूप शरीर के भीतर गर्मी जमा होने लगती है, जिसे आम भाषा में बॉडी हीट बढ़ना कहा जाता है।
बॉडी हीट बढ़ने के प्रमुख कारण
विशेषज्ञों के अनुसार शरीर में गर्मी बढ़ने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। सबसे सामान्य कारण अत्यधिक गर्म मौसम और लंबे समय तक धूप में रहना है। हीटवेव के दौरान शरीर बाहरी गर्मी को तेजी से अवशोषित करता है। यदि वातावरण में नमी अधिक हो, तो पसीना ठीक से वाष्पित नहीं हो पाता और शरीर को ठंडा होने में कठिनाई होती है। अत्यधिक शारीरिक श्रम या तीव्र व्यायाम भी शरीर के तापमान को बढ़ा सकता है। विशेष रूप से धूप में काम करने वाले मजदूर, एथलीट और निर्माण कार्यों में लगे लोग अधिक जोखिम में रहते हैं।
डिहाइड्रेशन (Dehydration) भी एक महत्वपूर्ण कारण है। शरीर में पानी की कमी होने पर पसीना कम बनता है और शरीर की प्राकृतिक कूलिंग प्रणाली प्रभावित हो जाती है। कुछ दवाइयां, जैसे मूत्रवर्धक (Diuretics), एंटीहिस्टामाइन तथा कुछ मानसिक रोगों के उपचार में प्रयुक्त दवाएं भी तापमान नियंत्रण प्रणाली को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा शराब का अत्यधिक सेवन, मोटापा, थायरॉइड विकार और कुछ संक्रमण भी बॉडी हीट बढ़ाने में भूमिका निभा सकते हैं।
किडनी पर क्यों पड़ता है असर?
किडनी शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने का महत्वपूर्ण कार्य करती है। जब शरीर अत्यधिक गर्मी के कारण डिहाइड्रेट हो जाता है, तो किडनी तक रक्त प्रवाह कम होने लगता है। इस स्थिति में किडनी को शरीर में उपलब्ध सीमित पानी को बचाने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। लंबे समय तक डिहाइड्रेशन बने रहने पर एक्यूट किडनी इंजरी (Acute Kidney Injury) का खतरा बढ़ सकता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि बार-बार होने वाला डिहाइड्रेशन किडनी स्टोन, मूत्र संक्रमण और किडनी फंक्शन में गिरावट जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। जिन लोगों को पहले से किडनी रोग, मधुमेह या उच्च रक्तचाप है, उनमें यह खतरा और अधिक होता है।
किन लोगों को अधिक सावधान रहने की आवश्यकता है?
कुछ समूहों में बॉडी हीट से जुड़ी जटिलताओं का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में अधिक होता है। इनमें शामिल हैं:
- 4 वर्ष से कम आयु के बच्चे
- 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग
- मधुमेह के मरीज
- किडनी रोग से पीड़ित व्यक्ति
- हृदय रोगी
- मोटापे से ग्रस्त लोग
- बाहर काम करने वाले श्रमिक
- खिलाड़ी और फिटनेस प्रशिक्षण लेने वाले लोग
इन व्यक्तियों में शरीर की तापमान नियंत्रण क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर हो सकती है, जिससे गर्मी का प्रभाव अधिक तेजी से दिखाई देता है।
बॉडी हीट के चेतावनी संकेत
शरीर की बढ़ती गर्मी कई लक्षणों के माध्यम से संकेत देती है। शुरुआत में ये लक्षण सामान्य लग सकते हैं, लेकिन इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:
- अत्यधिक प्यास लगना
- सिरदर्द
- कमजोरी और थकान
- चक्कर आना
- मांसपेशियों में ऐंठन
- अधिक पसीना आना
- मतली और उल्टी
- ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
यदि स्थिति गंभीर हो जाए तो व्यक्ति भ्रमित हो सकता है, बेहोश हो सकता है या उसे दौरे भी पड़ सकते हैं। यह हीट स्ट्रोक का संकेत हो सकता है, जो एक मेडिकल इमरजेंसी है।
बॉडी हीट बढ़ने पर क्या करें?
- यदि शरीर का तापमान बढ़ता महसूस हो, तो तुरंत ठंडी और हवादार जगह पर चले जाएं। भारी और तंग कपड़ों को ढीला करें तथा आराम करें।
- धीरे-धीरे पानी पिएं। आवश्यकता होने पर ORS, नारियल पानी या इलेक्ट्रोलाइट युक्त पेय पदार्थों का सेवन किया जा सकता है। माथे, गर्दन और बगल पर ठंडी पट्टी रखने से शरीर का तापमान कम करने में मदद मिलती है।
- यदि उल्टी, बेहोशी, तेज धड़कन, भ्रम या पसीना बंद होने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना आवश्यक है।
बचाव ही सबसे बेहतर उपाय
- विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश मामलों में बॉडी हीट और उससे होने वाली जटिलताओं को रोका जा सकता है।
- इसके लिए दिनभर पर्याप्त पानी पीना, नारियल पानी और छाछ जैसे प्राकृतिक पेय लेना, हल्के सूती कपड़े पहनना और दोपहर की तेज धूप से बचना महत्वपूर्ण है। खीरा, तरबूज, दही और मौसमी फलों जैसे जल-समृद्ध खाद्य पदार्थ भी शरीर को ठंडा रखने में सहायक होते हैं।
- गर्मियों में व्यायाम सुबह या शाम के समय करना बेहतर माना जाता है, जब तापमान अपेक्षाकृत कम होता है।
निष्कर्ष
बॉडी हीट केवल गर्मी महसूस होने तक सीमित समस्या नहीं है। यह शरीर के जल संतुलन, किडनी की कार्यक्षमता और समग्र स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। समय रहते लक्षणों की पहचान, पर्याप्त जल सेवन और उचित सावधानियां अपनाकर हीट से जुड़ी गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और किडनी रोगियों को गर्मियों के दौरान अतिरिक्त सतर्क रहने की आवश्यकता है।
