केसर सिंह / स्वदेशी हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट
फ्रोजन शोल्डर, जिसे चिकित्सकीय भाषा में एडहेसिव कैप्सुलाइटिस (Adhesive Capsulitis) कहा जाता है, कंधे के जोड़ की एक ऐसी स्थिति है जिसमें दर्द, जकड़न तथा गति की सीमितता धीरे-धीरे विकसित होती है। यह समस्या विशेष रूप से 40–60 वर्ष आयु वर्ग के लोगों में अधिक देखी जाती है तथा मधुमेह (Diabetes Mellitus), थायरॉयड विकार और लंबे समय तक कंधे को निष्क्रिय रखने वाले व्यक्तियों में इसका जोखिम बढ़ जाता है। यद्यपि अधिकांश मामलों में यह रोग समय के साथ स्वतः सुधार की ओर बढ़ता है, फिर भी उचित उपचार और नियमित व्यायाम से रिकवरी की गति बढ़ाई जा सकती है तथा दैनिक जीवन की कार्यक्षमता में सुधार लाया जा सकता है।
फ्रोजन शोल्डर क्या है?
कंधे का जोड़ (Shoulder Joint) शरीर के सबसे अधिक गतिशील जोड़ों में से एक है। यह एक मजबूत संयोजी ऊतक (Joint Capsule) से घिरा रहता है। फ्रोजन शोल्डर में यही कैप्सूल मोटा, कठोर तथा संकुचित हो जाता है, जिसके कारण जोड़ की सामान्य गति बाधित हो जाती है। इस स्थिति में कंधे को ऊपर उठाना, पीछे ले जाना, कपड़े पहनना, बाल संवारना अथवा दैनिक कार्य करना कठिन हो सकता है। कई रोगियों में रात के समय दर्द अधिक महसूस होता है, जिससे नींद भी प्रभावित होती है।
फ्रोजन शोल्डर के चरण
विशेषज्ञ आमतौर पर इस रोग को तीन चरणों में विभाजित करते हैं:
| चरण | प्रमुख लक्षण | अनुमानित अवधि |
|---|---|---|
| Freezing Phase (जकड़न प्रारम्भ) | दर्द बढ़ना, गति कम होना | 2–9 माह |
| Frozen Phase (स्थिर जकड़न) | दर्द अपेक्षाकृत कम, परंतु कठोरता अधिक | 4–12 माह |
| Thawing Phase (सुधार चरण) | गति धीरे-धीरे वापस आना | 5–24 माह |
जोखिम कारक
कुछ स्थितियाँ फ्रोजन शोल्डर की संभावना बढ़ा सकती हैं:
- मधुमेह (Diabetes)
- हाइपोथायरॉयडिज्म एवं हाइपरथायरॉयडिज्म
- हृदय रोग के बाद लंबा आराम
- स्ट्रोक के बाद कंधे की निष्क्रियता
- कंधे की चोट या सर्जरी
- बढ़ती आयु
- महिलाओं में अपेक्षाकृत अधिक जोखिम
प्रमुख लक्षण
फ्रोजन शोल्डर के सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:
- कंधे में लगातार दर्द
- हाथ ऊपर उठाने में कठिनाई
- पीछे की ओर हाथ ले जाने में परेशानी
- कपड़े पहनने या ब्रा/शर्ट के बटन लगाने में कठिनाई
- रात में दर्द बढ़ना
- कंधे की गति का धीरे-धीरे सीमित होना
निदान (Diagnosis)
निदान मुख्यतः रोगी के लक्षणों एवं शारीरिक परीक्षण के आधार पर किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर निम्न जांचें की जा सकती हैं:
- एक्स-रे (X-Ray)
- अल्ट्रासाउंड (Ultrasound)
- एमआरआई (MRI)
इन जांचों का उद्देश्य अन्य कारणों, जैसे रोटेटर कफ चोट, गठिया अथवा कैल्सिफिक टेंडिनाइटिस को बाहर करना होता है।
उपचार के प्रमुख विकल्प
1. फिजियोथेरेपी
फिजियोथेरेपी फ्रोजन शोल्डर के उपचार की आधारशिला मानी जाती है। इसमें नियंत्रित स्ट्रेचिंग, रेंज-ऑफ-मोशन (ROM) व्यायाम तथा मांसपेशियों को मजबूत करने वाले अभ्यास शामिल होते हैं।
2. दर्द एवं सूजन नियंत्रित करने वाली दवाएँ
नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इन्फ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs), जैसे इबुप्रोफेन या नेप्रोक्सन, दर्द और सूजन कम करने में सहायक हो सकती हैं। इनका उपयोग चिकित्सकीय सलाह के अनुसार किया जाना चाहिए।
3. कॉर्टिकोस्टेरॉइड इंजेक्शन
प्रारंभिक चरण में कंधे के जोड़ में दिए जाने वाले स्टेरॉयड इंजेक्शन दर्द कम करने तथा गति सुधारने में उपयोगी पाए गए हैं।
4. हाइड्रोडिलेटेशन
इस तकनीक में कंधे के कैप्सूल में नियंत्रित मात्रा में द्रव प्रविष्ट कराया जाता है, जिससे संकुचित कैप्सूल का विस्तार हो सके और जकड़न कम हो।
5. आर्थ्रोस्कोपिक कैप्सुलर रिलीज
यदि लंबे समय तक अन्य उपचारों से पर्याप्त लाभ न मिले, तो न्यूनतम आक्रामक शल्यक्रिया (Arthroscopic Surgery) की जा सकती है।
6. पीआरपी (PRP) थेरेपी
प्लेटलेट-रिच प्लाज्मा (PRP) एक उभरती हुई चिकित्सा पद्धति है। इसमें रोगी के रक्त से प्राप्त प्लेटलेट्स को प्रभावित क्षेत्र में इंजेक्ट किया जाता है। हालांकि प्रारंभिक अध्ययन आशाजनक हैं, लेकिन इसके दीर्घकालिक लाभों पर अभी और शोध की आवश्यकता है।
घर पर अपनाए जा सकने वाले उपाय
- कंधे को पूर्णतः निष्क्रिय न रखें।
- हल्के स्ट्रेचिंग व्यायाम नियमित करें।
- चिकित्सक की सलाह अनुसार गर्म सेंक का उपयोग करें।
- लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचें।
- मधुमेह रोगी रक्त शर्करा को नियंत्रित रखें।
उपयोगी व्यायाम
फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से निम्न व्यायाम किए जा सकते हैं:
- पेंडुलम स्ट्रेच
- फिंगर वॉक
- वॉल क्लाइम्ब
- क्रॉस-बॉडी स्ट्रेच
- टॉवल स्ट्रेच
- शोल्डर ब्लेड स्क्वीज़
- एक्सटर्नल रोटेशन एक्सरसाइज
- इंटरनल रोटेशन एक्सरसाइज
- पैसिव शोल्डर एलिवेशन
- ओवरहेड स्ट्रेच
ध्यान रखें कि व्यायाम के दौरान अत्यधिक दर्द होने पर अभ्यास रोक देना चाहिए और विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
निष्कर्ष
फ्रोजन शोल्डर एक सामान्य लेकिन अक्सर उपेक्षित मस्कुलोस्केलेटल विकार है, जो व्यक्ति की कार्यक्षमता और जीवन गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। प्रारंभिक पहचान, नियमित फिजियोथेरेपी, उपयुक्त औषधीय उपचार तथा जीवनशैली प्रबंधन के माध्यम से अधिकांश रोगियों में अच्छे परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। वर्तमान शोध नई जैविक चिकित्सा (Biologic Therapies) और पुनर्योजी चिकित्सा (Regenerative Medicine) की संभावनाओं को भी उजागर कर रहा है, जो भविष्य में उपचार को और अधिक प्रभावी बना सकती हैं।
